T.B(Tuberculosis) क्या है एवं इसके लक्षण और इसके उपचार क्या है ?

 नमस्कार दोस्तों मैं डॉक्टर सरोज कुमार। आपको स्वागत है मेरे ब्लॉग medecinehindi.com पर। दोस्तों आज के इस पोस्ट पर हम बात करेंगे ट्यूबरक्लोसिस यानी T B  के बारे में और हम इस पोस्ट में यह जानेंगे की ट्यूबरक्लोसिस के क्या कारन होते है किस जांचो में इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। साथ में इसकी गंभीरता का भी पता लगया जा सकता है। साथ में ट्यूबरक्लोसिस यानी टी बी का क्या इलाज होता है। यह आप इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे। 

दोस्तों हम शुरू करते है। ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण एवं इलाज के बारे में जानने के लिए। नमस्कार दोस्तों मेरा नाम डॉ सरोज कुमार है मैं एक सीनियर प्रोफेसर हूँ। डिपार्मेंट ऑफ़ ट्यूबरक्लोसिस एंड रेस्पिरेटरी डिजीज J N M कॉलेज अजमेर। हमरा जो  फील्ड फेफड़े  से सम्बंधित बीमारी का है। फेफड़े से सम्बंधित जो भी बिमारी होती है। उनका हम diagonostic treatment करते है। 

आज हम आपको टी बी से सम्बंधित कुछ जानकारी देना चाहूंगा। क्योंकि टी बी एक बहुत ही महत्वपूर्ण इन्फेक्शन बिमारी है। जिसमें एक से दूसरे में इन्फेक्शन पहुंचने में कुछ भी समय नहीं लगता है। एक पेशेंट अगर टी बी से सफर करता है। अगर यदि वह साल भर से बिना इलाज रहता है तो वो साल भर में कम से कम 15 नए लोगों को इन्फेक्शन फैला सकता है। यानी  उनलोगों को बीमारी पैदा कर सकता है। और टी बी एक जानलेवा बीमारी भी हो सकता है। अगर इसका समय पर उपचार नहीं किया गया।  

T.B Infection Through Breath

T B की बिमारी जो है एक कीटाणु से होती है। जिसे हम Mycobacterium Tuberculosis कहते है। मैकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस भी कई तरह के होते है। इसमें एक कॉम्पेक्ट होता है। जिसमें पांच तरह के मैकोबैक्टेरियम होता है। ये कीटाणु शरीर के अंदर टी बी पैदा करता है। ये कीटाणु शरीर में कैसे पहुंचते है। तो नॉर्मली खांसने से ,फूंकने से ,थूकने से फैलता है। जो भी टीबी के रोगी है यदि बिना मुँह पर कपड़ा रखें या बिना मास्क बांधें खांसते है या तो फिर इधर -उधर थूकते है। तो वो जो थूक होता है ,जो जमीन पर गिरता है। थोड़ा समय में सुख जाता है। सूखने के बाद हवा के साथ जो धूल के कण हवा में उड़ जाते है। तो उसके साथ टीबी के कीटाणु भी आ जाते है और शरीर में अंदर प्रवेश कर जाते है। तो ये जो बैक्टीरिया है। ये साँस के द्वारा ही शरीर में प्रवेश करता है। कभी -कबर अगर पैरो में कहीं चोट लगी है या शरीर के किसी भी अंग में एबॉर्शन है ,यदि वहां टीबी से सम्बंधित कुछ मटेरियल कनेक्ट में आ जाते है तो शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। और उसी जगह पर टीबी पैदा कर सकता है।  

टीबी का जो कीटाणु होते है नॉर्मली दो तरह के पाए जाते है :-
(1) Atypical 
(2) Typical 
तो अभी तक हम जो आगे बात करेंगे। वो सारे टिपिकल मैकोबैक्टेरियम के बारे में बात करेंगे। उसके क्या लक्षण होते है  वो किस तरह के टीबी होते है। और उसके रक्त के सेन्सिटिवि क्या होती है। और ट्रीटमेंट क्या होता है। दूसरे जो कीटाणु होते है। अटीपिकल मैकोबैक्टेरियम कहलाते है। जो की वैसे काफी uncommon है और हम सिर्फ पेशेंट के क्लिनिकली कंडीशन और डाउट के आधार पर ही उसके आगे जाँच के लिए बढ़ सकते है। otherwise नॉर्मली हम Atypically मैकोबैक्टेरियम की जाँच नहीं कराते है। अटीपिकल मैकोबैक्टेरिया रैपिड ग्रोवर्स होते है। जो सात दिन के अंदर मल्टीप्लय हो जाते है। टीबी के जो लक्षण है ये डिपेंड करते है आपके शरीर के कौन से अंग में कितना इन्फेक्शन फैला है। मोस्ट कॉमन टीबी जो है फेफड़े के अंदर होते है। फेफड़े के टीबी के जो लक्षण होते है। मैनली खांसी ,हल्का बुखार ,शरीर में दर्द ,रात में पसीना आना ,भूख कम लगाना ,वजन कम होना ,कफ आना ,कफ के अंदर खून आना इस तरह के लक्षण होते है। जब ये बीमारी एडवांस हो जाती है। तो साँस लेने में भी दिक्कत पैदा होती हैये कॉमन लक्षण फेफड़े के टीबी के होते है। लेकिन फेफड़े के बहार जो टीबी होते है तो हैम उसे Extrapulmanry Tuberculosis कहते  है। इसे पहचानने में कई बार दिक्कते आती है ,तो extrapulmonary Tuberculosis शरीर के किसी भी अंग के अंदर हो सकता है। जो कॉमन साइड होता है , जो गले के अंदर गांठे हो जाती है। Lumps Nodes Tuberculosis कहलाते है। 

lumps inside the troats

पथरियों में पानी भर जाट है। जिसे हम Pleural Effusion कहते है। शरीर के और अंगो में भी पानी भर जाता  है। जैसे हर्ड के चारों तरफ पानी भरता है। उसे pericadial Effusion कहते है। पेट में पानी भरता है जिसे Ascites कहते है। तो इस तरह से कोई भी झिल्ली होती है। उसमें टी बी का इन्फेक्शन हो सकता है। उसमें Extrapulmonary डिफिनेशन के अंदर आता है। इसके अलावा बॉडी के दूसरे अंग commanly जैसे हड्डियों के अंदर भी टी बी हो सकते है। खांसतौर पर रीढ़ की हड्डी( Pott 's spine ) उसके भी अंदर टी बी हो सकते है। 

 Pott 's spine

दूसरे ऑर्गन जो Extrapulmonary की रेंज में आते है। कॉमन है जैसे पेट के अंदर टीबी हो सकती है। आँतों के अंदर टीबी का इन्फेक्शन हो सकते है। न्यूट्रेस में भी हो सकता है। ये सब Extrapulmonary Tuberculosis कहलाते हैं। इनके लक्षण पहचानने में थोड़ी - मुश्किल आती है। क्योंकि इसके अंदर ऑर्गन specific symtems develope होते है। और हम हर बार इन्फेक्शन देखने के बाद ये नहीं कह सकते है की टीबी है या कोई और इन्फेक्शन है। तो इसको दिएगोनेस्टीक करना भी एक चैलेंज होता है। आज मैं आप से Extrapulmonary Tuberculosis के बारे में बात करना चाहूंगा। जैसे Pleural effusion .

Pleural effusion organ symtems


Pleural effusion in organ



ये जो झिल्लिया होती है। उसमें पानी भर जाता है। Pleural effusion दो तरह के होते है। 
(1) exudative. 
(2) transudative. 

ये commonly टीबी के कारन होते है। हम ये मान कर चलते है की पानी भरा है तो टीबी एक Differential Diagnostics एकल है। तो एक संभावना हो सकती है। उस रोगी के अंदर लेकिन इसका diagonostics बहुत ही जरुरी है। रूटीन में हम पानी asperate करते है। जैसे पानी को बहार निकलते है तो उसकी जांच कराते है। एक तो नार्मल biochemical जाँच होती है। जिसके आधार पर हम टीबी को dosis iagonकर सकते है। यदि Bio -Chemical जांच inclusive होते है तो हम sytology भी कर सकते है Food की अंदर किस तरह सेल आ रही है। वो सेल कोई कैंसर का सेल तो नहीं है। या कोई निमोनिया का तो सेल नहीं है। तो हम diagonos करते है। इसके अलावा कोई कई आज कल एडवांस diagonostics  आ गई है। जिसे हम नुक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन कहते है। कॉम,माओं भाषा में Genexpert भी कहते है। तो पानी को कोई भी Tisue or nuclic acid amplification से जांच कर सकते है। जिसमे अगर टीबी के कम - से -कम संख्या में भी बक्टेरिया होते है तो हम जांच कर लेते है।  

अगर ये भी टेस्ट नेगेटिव आते है तो हम मेडिकल पैथोलोजिस्ट यानी जिसे हम Biopsy  कहते है जैसे पथरियों में पानी भर गया उन झिल्ली में से हम Tissue sample लेकर हम टीबी के लिए जांच करवा सकते है। अब टीबी की जांच करने के लिए हमारे पास Thoracoscopy की सुबिधा है। Thoracoscopy का मतलब पथिरियों में एक थोड़ा सा चीरा लगाकर जिसमें एक या दो टांकें आते है। एक endoscopy  होता है। जिसे हम पथिरियों में introduce करते है। और पानी निकल सकते है। पुरे फेफड़े के  झिल्ली का अवलोकन करते है। अच्छी तरह से इन्फेक्शन करते है। और जो हमें लगता है की disease side है की ये बीमारी वाला हिस्सा है। तो डायरेक्ट हम वहां विज़न के अंदर सैंपल लेकर हम टीबी का जांच कराते है। इसी तरह दूसरे Extrapulmanry Tuberculosis जैसे मैं इफ़ेक्ट बताई LYMPH NODE TUBERCULOSIS है। यहाँ से भी हम नीडल द्वारा  asparate करके सैंपल लेकर टीबी का जांच दे सकते है और इस तरह के एडवांस जांच करवा सकते है। इन जांचों के हमारे दो advantage है। एक तो ये है की उसके अंदर टीबी के कीटाणु कम -से -कम संख्या में मौजूद है तो भी हम टीबी का दिएगोनोस्टिक्स कर सकते है। ये जांच टीबी के कीटाणु को पकड़  लेती है। दूसरा advantage इसका sensetive Type का होता है। senestive का मतलब ये होता है की जो भी टीबी के कीटाणु मौजूद होते है। उस पर कौन सी दवाई काम करेगी ये बता देगी। जो टीबी के कॉमन दवाई है isoniazid , Rifampicin इससे हम टेस्ट कर पाते है। की जो बक्टेरिया है वो sensetive है या Resistant है। यदि सेंसेटिव है तो रुटीन टीबी की दवाई है। 

जो The National Tuberculosis Elimination Programme (NTEP) के अंदर उपलब्ध करवाती है। तो ये दवाई चलती है। यदि किसी भी दवाई से रेसिस्टेंट पाया जाता है। तो उस रेसिस्टेंट के लिए DFT guides treatment होता है। मतलब किसी particular suppose sympathetic  Ophthalmic on Immunosuppression। अगर इन दोनों से रेसिस्टेंट है। अगर इस तरह के रेसिस्टेंट पाएर  जाते  है तो हम further हम जांच करते है। आगे 2nd लाइन ड्रग्स भी होती है। 

उसके लिए भी हम रेसिस्टेंट की जांच करते है। कहीं उन दवाइयों से भी रेसिस्टेंट तो नहीं हो रहा है। मेरी कहने का मुख्या लक्ष्य यही है की यदि आपको कहीं भी टीबी diagonos की जाती है किसी भी फिजिशियन के द्वारा किसी भी लेवल पर तो आप आगे के टेस्ट के लिए पूछ सकते है। की मेरी टीबी किस तरह है। रेसिस्टेंट IP तो नहीं है यदि रेसिस्टेंट IP टीबी है। तो उसकी जांच करवाइये। यदि जांच में रेसिस्टेंट टीबी आता है तो उसके लिए काफी एडवांस ट्रीटमेंट उपलब्ध है । रेसिस्टेंट टीबी के बारे में मैं आपको बताना चाहूंगा ,इसके लिए जो ड्रग्स उपलब्ध है जो गवर्नमेंट की तरफ से साड़ी दवाइया मुफ्त में प्रदान किया जाता है। और इन दवाइयों को नियमित रूप से ले। इन दवाइयों का जो ट्रीटमेंट duration है जो अलग -अलग टीबी में अलग -अलग तरह से होते है। ज्यादा तर टीबी के जो इन्फेक्शन है ,बीमारिया है। 6 महीने के अंदर ठीक हो जाते है। और हम ट्रीटमेंट बंद कर देते है। लेकिन कभी -कभी हमें 9 महीना से 12 महीना ट्रीटमेंट देना परता है। इसके अलावा ड्रग्स रेसिस्टेंट Tuberculosis होती है। हम MDR TB ,PREXDR TB ,XDR TB कहते है। 

इसमें ट्रीटमेंट हमें  अमुहन 24 महीने तक भी देना परता है। और इसके अंदर भी एडवांस दवाइयां भी उपलब्ध है ,बेडाक्वीलीन, Delamanid इस दवाइयों के इंट्रोडक्शन के बाद जो ड्रग्स रेसिस्टेंट Tuberculosis  किसी ज़माने में 50 % हुआ करती थी। अब 80 % की रेंज में आ गई है। ये सब जानना आपको इसलिए आवश्यक है क्योंकि WHO का जो टारगेट है। इस विशव को सन 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाएंगे। 

तो टीबी मुक्त बनाने के लिए ये जरुरी है की आम जनता टीबी के लक्षण के बारे में जाने यदि उन्हें ऐसा लगता है की हमारे लक्षण टीबी से मिलते जुलते है। तो वो हॉस्पिटल में जाकर जांच करायें। जांच के बाद आगे सेन्सेटिव टेस्ट करायें। और सेन्सेटिव टेस्ट के आधार पर पक्का इलाज करायें। जिससे की वो खुद भी ठीक हो सके और कम्युनिटी में ,और परिवार में ,और दुसरो में इन्फेक्शन नहीं फैला सके। टीबी मुक्त बनाने के लिए एक और पहल जो इम्पोर्टेन्ट स्टेप है। सिर्फ मरीजों का इलाज जरुरी नहीं है। एक लेटेन्ट टीबी होता है। जो active टीबी मरीजों के कांटेक्ट में आते है। या कम्युनिटी वाले है जो एक जगह से जो कांटेक्ट में आ रहे है इन लोगों का टीबी इन्फेक्शन डिटेक्ट करना और इलाज करना उतना ही आवश्यक है। 

अभी जो The National Tuberculosis Elimination Programme (NTEP) जो भारत में चल रहा है। इसमें लेटेन्ट टीबी का Infection Treatment  जो दिया जा रहा है। इसमें specific test होते है। जो दो तरह के होते है। उनमें से एक टेस्ट Mantoux Diagnosis टेस्ट होता है। और दूसरा IGRA  टेस्ट कहलाता है। जो गामा interfare और blood को detect करता है। ये दोनों टेस्ट latent टीबी को बता सकते है। की रोगी के अंदर लेटेन्ट टीबी है। लेटेन्ट टीबी को diagonosis करना उसका Treatment करना इसलिए जरुरी है। क्योंकि लेटेन्ट टीबी का मतलब ये होता है की शरीर के अंदर टीबी के कीटाणु मौजूद है। उन्होंने अभी बिमारी पैदा नहीं की है। क्योंकि ये कीटाणु वर्षो तक शरीर में मौजूद रहते है। और इन कीटाणुओं को कभी भी body में develope होने की या multiply होने की अच्छी तरह से वहां पर महौल मिलता है तो वह multiply होना चालू हो जाता हैfor example किसी की diabities हो जाती है या हार्ट की बिमारी हो जाती है या कुछ इस तरह की ड्रग्स लेता है। जिससे uminity compromise हो जाता है। या cancer develope हो जाता है। तो ये जो लेटेन्ट टीबी होना स्टार्ट हो जाता है। 

और बिमारी को पैदा करते है। इसलिए टीबी को control करने के लिए लेटेन्ट टीबी एवं एक्टिव टीबी का इलाज करना बहुत जरुरी है। तो यदि आप किसी रोगी के contact में आये है तो या परिवार में किसी को टीबी है तो आप भी अपना लेटेन्ट टीबी के लिए जांच जरूर करायें। और यदि ये टेस्ट possitive आता है तो उसके लिए बहुत सिंपल सा इलाज होता है। एक या दो दवाइया लेनी परती है। वो लेकर आप टीबी के कीटाणु से मुक्त पा सकते है। तो हर तरह से अपने टीबी के लक्षण को जाने। अपनी जांच करवाएं। और आप accordingly treatment करवाएं। जो की अत्यंत आवश्यक है। तो दोस्तों हमारे साथ ये Dr. saroj kumar जिन्होंने हमें टीबी के कारणों के बारें में,टीबी के लक्षण के बारे में ,और इसके जांच के बारे में और टीबी के इलाज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। बांकी भारत के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर से कंसल्ट करने के लिए ,परामर्श लेने के लिए आप हमारे  कमेंट बॉक्स में अपना नाम मोबाइल नंबर लिखकर कमेंट करें। हम आपको कांटेक्ट कराएँगे। हेल्थ से रिलेटेड समस्या के लिए हमसे संपर्क करें। 
धन्यबाद। 








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